
स्टायपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर सोमवार से हड़ताल पर गए एमवाय अस्पताल के 400 जूनियर डॉक्टरों द्वारा मंगलवार को सामूहिक इस्तीफा देने के बाद बुधवार को एमवाय अस्पताल में व्यवस्थाएं चरमराने लगी हैं। मरीज परेशान हो रहे हैं। नए मरीज भी भर्ती नहीं किए जा रहे हैं और न ही ऑपरेशन की तारीख दी जा रही है। ट्रेनिंग ले रही नर्सिंग की छात्राओं के भरोसे वार्ड हैं, जिन्हें अभी यह भी ठीक से नहीं पता कि नेबुलाइजर मशीन कहां से लाना है। दवा लाने के लिए किधर जाना होगा। उधर डॉक्टरों को पीजी कोर्स से निषकाषित करने के लिए चिकित्सा शिक्षा के अपर मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया दिल्ली रवाना हो गए है। जुलानिया दिल्ली में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को जूनियर डॉक्टरों को बर्खास्त करने का आवेदन देंगे। इसके साथ ही वे नए सिरे से सीट अलॉट करने पर भी एमआईसी से चर्चा करेंगे। मप्र सरकार ने मंगलवार को हड़ताल कर रहे 20 जूनियर डॅक्टरों को बर्खास्त कर दिया था जिसमें 5 डॉक्टर एमजीएम मेडिकल कॉलेज इंदौर के है।
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